Saturday, January 30, 2016

प्रभु !!!

प्रभु में प्रेम प्रेम में प्रभु बसते
पूजा से पावन भाव सरसते
हो मालिन्य मन से प्रक्षालित
ज्ञान आलोक मेघ तब बरसते ।
★★★★★
@विपुला

खुद ही जाम पे जाम पिलाकर अब
मेरी आवारगी के चर्चे नहीं अच्छे ....
◆◆◆
@विपुला

मुक्तक

तसवीर सुनहरे ख्वाबों की हो तुम 
तक़दीर सजीले हाथों की हो तुम 
तुमसे ही हुआ जीना जीवन सनम 
तहरीर सुरीले साज़ो की हो तुम ।
★★★
@ डॉ. अनिता जैन "विपुला"

Sunday, September 14, 2014

आज कुछ पंक्तियाँ कुलांचें माररही है ,क्यों न आपके साथ शेयर की जाये ..
कविता क्या है 
क्या सुना कभी 
आपने 
किसे कहतें हैं 
कविता 
नहीं पता ..मुझे 
मैंने तो लिखी 
प्रिय के लिये 
इक छोटी -सी
पाती 
जिसमें भरा था 
नेह निर्मल 
सागर -सा 
सलिल 
बस पा सकूँ 
उसका अहसास 
आस- पास 
पल -पल 
रहे साकार 
सौंदर्य अपार
अति आनंद भरा 
शब्द -निशब्द 
मनभावन 
अतिपावन 
संसार 
सार ...........