प्रभु में प्रेम प्रेम में प्रभु बसते
पूजा से पावन भाव सरसते
हो मालिन्य मन से प्रक्षालित
ज्ञान आलोक मेघ तब बरसते ।
★★★★★
@विपुला
Kavya Vipula
Saturday, January 30, 2016
प्रभु !!!
मुक्तक
तसवीर सुनहरे ख्वाबों की हो तुम
तक़दीर सजीले हाथों की हो तुम
तुमसे ही हुआ जीना जीवन सनम
तहरीर सुरीले साज़ो की हो तुम ।
★★★
@ डॉ. अनिता जैन "विपुला"
Sunday, September 14, 2014
आज कुछ पंक्तियाँ कुलांचें माररही है ,क्यों न आपके साथ शेयर की जाये ..
कविता क्या है
क्या सुना कभी
आपने
किसे कहतें हैं
कविता
नहीं पता ..मुझे
मैंने तो लिखी
प्रिय के लिये
इक छोटी -सी
पाती
जिसमें भरा था
नेह निर्मल
सागर -सा
सलिल
बस पा सकूँ
उसका अहसास
आस- पास
पल -पल
रहे साकार
सौंदर्य अपार
अति आनंद भरा
शब्द -निशब्द
मनभावन
अतिपावन
संसार
सार ...........
कविता क्या है
क्या सुना कभी
आपने
किसे कहतें हैं
कविता
नहीं पता ..मुझे
मैंने तो लिखी
प्रिय के लिये
इक छोटी -सी
पाती
जिसमें भरा था
नेह निर्मल
सागर -सा
सलिल
बस पा सकूँ
उसका अहसास
आस- पास
पल -पल
रहे साकार
सौंदर्य अपार
अति आनंद भरा
शब्द -निशब्द
मनभावन
अतिपावन
संसार
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