Saturday, January 30, 2016

प्रभु !!!

प्रभु में प्रेम प्रेम में प्रभु बसते
पूजा से पावन भाव सरसते
हो मालिन्य मन से प्रक्षालित
ज्ञान आलोक मेघ तब बरसते ।
★★★★★
@विपुला

खुद ही जाम पे जाम पिलाकर अब
मेरी आवारगी के चर्चे नहीं अच्छे ....
◆◆◆
@विपुला

मुक्तक

तसवीर सुनहरे ख्वाबों की हो तुम 
तक़दीर सजीले हाथों की हो तुम 
तुमसे ही हुआ जीना जीवन सनम 
तहरीर सुरीले साज़ो की हो तुम ।
★★★
@ डॉ. अनिता जैन "विपुला"